मेरे पिछले लेख के बाद अगर मै ये लेख लिख पा रही हूँ तो इसका पूरा शेर्य जाता है हमारी क्रिकेट टीम को जिसने हम भारतीयों की "प्याले की तलब" को पूरा किया और इसका मरहम सचिन पाजी को लगाया. दिल की खुशियाँ छुपाए नहीं छुपती, ऐसा लगता है मानो मैच हमने ही जीता है, आखिरी छक्का धोनी ने ही नहीं बल्कि पूरे भारत ने लगाया है, अब तो पूरे "जहाँ के हम सिकंदर हैं". जीत के बात जो पठाखे जलाए गए हैं, जो खुशियाँ मनाई गई हैं.... एक मुश्त कहा जाए तो जो दिवाली मनाई गई है वो ऐसी दीवाली है जो क्यों मनाई गई है ये हम अपनी आँखों से देखने वाले बेहद खुशनसीब लोग हैं जो आने वाले कई सालों तक इस खुशी को गाएंगे. राम और राम के सेना ने लंका जीती थी या नहीं इसका कोई साक्ष्य है या नहीं पर साक्षी के धोनी और धोनी की सेना ने लंका पर विजय प्राप्त की है इसके कई साक्षी हैं. भले ही भारत पूरे विश्व पर छाया था घोटालो को ले कर पर इस जीत के बाद पूरी दुनिया ने उसके सात खून माफ़ कर दिए हैं. फिल्मस्टार्स ने इस साल विश्व स्तर पर कोई बड़ा अवार्ड नहीं जीता, नेताओं ने भी विश्व स्तर पर कोई खास डंका नहीं बजाया पर हमारी क्रिकेट टीम ने पूरी दुनिया को धो डाला है और चुटकी बजा के धुल चटा ही दिया है.

bhut acha hai.
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