एक प्याली चाय दिन बना देती है, एक प्याली काफ्फी दोस्त बना देती है. फिर चाहे वो प्याली मिटटी की हो कांच की या स्टील की सबका मन तृप्त करती है, पर मै यहाँ जिस प्याले की बात करने जा रही हूँ वो तो ऐसा "प्याला" है जिसकी दीवानी पूरी दुनिया है... और उस एक प्याले को पाने के लिए दुनिया भर के देशों ने लोहा लिया, कड़ी मेहनत की, और कई दिनों की मशकत के बाद अब, परिणाम चाहे जो हो ये "प्याला" एशिया में ही आना है. जी हाँ मै बात कर रही हूँ वर्ल्ड कप(प्याला) की.. एक प्याला पूरी दुनिया का!! वर्ल्ड कप की शुरुआत से ही हर हिन्दुस्तानी के दिल में खलबली शुरू हो गई थी, लोग हर मैच में टकटकी लगा देखते थे, बुरा खेलने पर टीम की कमियों का बखान उतनी ही जोर शोर से होता था जितना जीत जाने पर तारीफ. और हो भी क्यों न? अरबो भारतियों के लिए क्रिकेट सिर्फ एक खेल ही नहीं बल्कि लोग इसे धरम की तरह मानने लग गए हैं. जहा तेंदुलकर भगवान् है और हनुमान की तरह सेना ले कर धोनी चले हैं लंकंस से लोहा लेने. ये तो हमारा दिल है जो इस एक खेल को धरम, करम, और मरहम मान बैठे हैं, और इस मरहम की सबसे ज्यादा जरुरत है सचिन पाजी को जो शतकों के शतक नहीं लगा पाए पिछले मैच में. भारत जब सेमी final पंहुचा तो ऐसा लगा मानो " रात भी एक नई सुबह hogai, रात भी एक नई शुरुआत होगी ". अब तो हर भारतीय का नारा है, "बम्बई चलो ये वर्ल्ड कप हमारा है" . हर कोई ऐसा महसूस कर रहा है जैसे शेर के मुह में खून लग गया है और अब इस "प्याले" की ललक-लालसा-तलब दूर होनी ही चाहिए...... दे घुमा के !!!

finaly india ne pyala jeet liya.
ReplyDeletekisi bhi cheez ki zyada talab hanikarak hai, agar ye na mile to dil -dimag kabu me nahi rahta. behtar yahi hoga ki talab ke sath dil-dimag ko bhi qabu rakhe.
ReplyDeleteji jarurur dhyan me rakhungi!
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